Tuesday, 26 March 2013

अब की होली ..... मैं जोगन तेरी होली !!




















तेरे नाम की चुन्नर मैंने ओढ़ी है
लेकर दिल में प्यार तेरा
सारी दुनिया मैंने छोड़ी है !!
हूँ तेरी सांसों के  हिसाब की मुनीम
ना कसम मैंने ये कभी तोड़ी है !
होली होली अब की  होली
बन अपने जोगी की जोगन
तुझ संग प्रीत की डोरी जोड़ी है !

जब से तेरे करीब आई,
तब से है मैंने ये जाना !
तेरे एहसास में दिल मेरा
हर पल गाए खुशियों का तराना !!
मेरे जोगी तेरा क्या कहना !
पाकर रूहानी प्यार तेरा
 अब ना है कुछ पाना !
होली होली अब की होली
बन अपने जोगी की जोगन
सबसे अनोखा रिश्ता है निभाना !!

बेहद प्यार है तुमसे कैसे तुम्हें बताऊँ !
तेरे करीब आई तो हो गई समर्पण
अब ना है कोई शिकायत ,ना कोई शिकवा
ज़िन्दगी हुई कितनी हसीन,ना मैं जता पाऊँ !!
होली होली अब की होली
बन अपने जोगी की जोगन
हर पल अपना तेरे लिए जी जाऊँ !


जो तू चमके, तो मैं और भी चमकूँ !
ऐसी तेरी प्रेम दीवानी हो गई
जोगन मस्तानी, सुध बुध  खो गई !!
इस रूहानी इश्क ने, यूँ भिगोई मेरी चोली
होली होलीअब  की  होली
करना  है  तुझ  को  हो  ली !!
होली  होली  बन  होली (holy)
अब की होली
मैं जोगन  तेरी  होली !!

Thursday, 21 February 2013

रूहानी प्यार का अटूट विश्वास

सच्ची दुआ खुदा  से  एक पंछी की 






















इक  छोटी सी  पंछी को  रहता  हर पल रूहानी यारी का गुमान !
अपनी यारी  और यार की सरदारी पर है उसको सच्चा अभिमान !
एक दिन कुछ शिकारी आ घेरे , छोटी सी पंछी को आन !
देते ताने बोले रह  गई तू अकेली ,  होगी तू  परेशान !
उड़  चला तेरा दोस्त परिंदा, भरली और चिड़िया संग उड़ान !!

 वो बोली शिकारी से तुम क्या   जानो   मेरी यारी का  इमान !
उसकी  ख़ुशी के लिए मर  मिटना ही है मेरा सम्मान !
मैं तो उसके  रंग में रंगी , फिर  कैसे हो  सकती हूँ  बियाबान !!
आज़ादी की डोर ही तो करे रूहानी रिश्ते को बलवान !!
उसकी हर उड़ान में है मेरी  अपनी  शान !!


उसके हर  सपने को  बना अपना मैंने सच्ची  ख़ुशी  पाई !
 भरने के लिए उसके जीवन में खुशियाँ ,
  गगन के उस  पार मैं उड़ान  भर आई !!
जब खटखटाया मैंने खुदा का दरवाज़ा ,
"क्या  चाहिए" की आवाज़ आई!
मैं बोली मेरे  दोस्त की खुशियों की देती हूँ  दुहाई !!
बोले खुदा  सागर से भी गहरी है  तेरी  प्रीत की  गहराई !!
लेजा सारी खुशियाँ,, तेरे इस प्रीत से मेरी अखियाँ भर आई
और  मैं सब अपने दोस्त परिंदे के लिए  भर झोली ले  आई !
फिर चाहे वो  किसी के संग भी भरे  अपनी उड़ान

 उसकी हर उड़ान में है मेरी  अपनी  शान !!

उसकी मेरी यारी तो है , है रूह की रिश्तेदारी
हंसने और हंसाने की उसको मैंने ली है ज़िम्मेदारी !!
कच्चे धागे का पक्का रिश्ता, न तोड़   पायेगा  कोई
सुन ले ओ शिकारी ! चाहे घूम ले दुनिया सारी !!
खुद की एक पहचान बनाये ले के अम्बर की उडारी !!
फिर क्यूँ सोचूं  उसको कैद में रखने के बारे
जिसकी हो चुकी हूँ मैं सारी  की सारी !!
हम तो है बस रूह के साथी
जैसे राधा और मुरारी !!

फिर चाहे वो  किसी के संग भी भरे  अपनी उड़ान 
उसकी हर उड़ान में है मेरी  अपनी  शान !!

राधा से भी बोले सब तेरा कान्हा छलिया है
छेड़े हर गोपी को ऐसा रास रचिया  है !!
तो बोली राधा तुम चाहते हो उससे मिलने वाले सुख को
मैंने चाहा  है उसके हर दुःख को
जो वो रहे हर गोपी के संग
मन में उठती एक ही तरंग
जब मैं ही कान्हा की हो गयी
तो उससे जुडी  हर प्रीत से कैसे होगी जंग
हम  तो बंधे है एक दूजे से ऐसे
जैसे डोर और पतंग !!

फिर चाहे वो  किसी के संग भी भरे  अपनी उड़ान 
उसकी हर उड़ान में है मेरी  अपनी  शान !!

पंजाबी में 
ਕੋਈ ਆਖੇ ਕਮਲੀ ਤੇ ਕੋਈ ਸ਼ੁਦਾਈ,ਮੈਂ ਤਾਂ ਯਾਰ ਲਈ ਆਪਣਾ ਆਪ ਗਵਾਈ !!
ਏਕ ਓਹੀ ਖੁਦਾ ਹੈ ਗਵਾਹ ਮੇਰਾ ਜੋ ਜਾਣੇ ਨਾ ਹੈ ਪ੍ਰੀਤ ਪਰਾਈ !!

ਬਣ ਹਵਾਂ ਉਡਦੀ ਆਂਵਾ  ਜੇ ਕਦੇ ਯਾਦ ਮੇਰੀ ਆਈ  !

ਕੋਈ ਬੀਤੇ ਨਾ ਪਲ ਜਦ ਹੋਵਾਂ ਜੋਗੀ ਦੀ ਸ਼ਰਨਾਈ !!
ਨੀ ਮੈਂ ਜਾਣਾ ਜੋਗੀ ਦੇ ਨਾਲਮੈਂ ਦੇਂਦੀ ਹਾਂ ਦੁਹਾਈ !!

ਏਕ ਪਲ ਵੀ ਉਸ ਤੋਂ ਦੁਰ ਨਾ ਜਾਵਾਂ 
ਓਹੋ ਚਾਨਣ ਤੇ ਮੈਂ ਉਸਦੀ ਪਰਛਾਈ !! 

ਨਾ ਲਗਣ ਦਵਾਂ ਗਰਮ ਹਵਾਂਵਾ 

ਮੈਂ ਮਰ ਜਾਵਾਂ ਉਸਦੀ ਆਈ !!!

Saturday, 19 January 2013

GIFT - Every Second of My Life













अखियों से दूर, पर दिल के सदा है पास
तेरा  एहसास ही है, मेरे लिए सबसे  खास
याद करूँ तुझे अपने हर श्वास- श्वास !
आज के इस मुबारक दिन
क्या तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल, हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!

जब भी सोचा तो कुछ न समझ आया
दिल में बस यही हर बार  ख्याल आया
जो मीरा ने खुद को गवां मोहन को पाया !
ऐसे ही मैं तेरी रूह में समाई
बस तू ही तू , मैं कहीं नहीं
बना सांसों की माला, सिमरू  तेरा नाम
ऐसा अपना हर पल, हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!


जब से किया तूने इस दिल में निवास
इस आम के लिए  हो  गए सबसे खास !
तेरी खुशियों को जोडूं, न आने दूँ कोई गम पास 
बदले में न है कोई उम्मीद और न है  कोई आस !!
आज के इस खास दिन
बन कर तेरी सांसों के हिसाब की मुनीम
हर पल, हर क्षण बेफिक्र करती हूँ तुम्हें !!!

याद आता है वो पल जब मैं तुमसे मिलने आई
तुम्हें लगा ये बांवरी कोई नयी आफत ले आई !
भले ही मैंने न कहा तुमसे कुछ
मेरी ख़ामोशी तेरे दिल को दस्तक दे आई
बिछड़ने जो लगी तुमसे तो मेरी अखियाँ भर आई !!
न जाने कैसा चढ़ा रंग, अपने सूफी की हो गई मैं मलंग
ऐसी  कमली भला क्या दे सकती है तुम्हें
बन तेरी परछाई, हर पल साथ देने  का वायदा देती है तुम्हें !!!

हर रोशन दुआ,   करे दूर अँधेरा
आज के दिन सज गया नया सवेरा
मेरा मन भी तेरा, तन भी तेरा
तेरा ही सब कुछ  समर्पित करती हूँ तुम्हें !
और भला क्या तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!!

तुझ से ही तो मेरे जीवन का सार है
तुझ संग ही तो जाना गगन के उस पार है !
जैसे बिना जल के मछली की न कोई कहानी है
गर करो जुदा मछली को पानी से
तो उसको खाने वाला भी करता पानी पानी है !!
तेरी मेरी यारी  भी तो  दुनियावी नहीं रूहानी है
तो और भला क्या तोहफा  दे सकती हूँ तुम्हें
ज़िन्दगी भर खुश रहे, दुआओं की  सौगात देती हूँ तुम्हें !!!

न जाने कब ख़त्म हो जाये ये सफ़र
जब तक होगा  दम ओ सांसो का असर
तेरे हर सपने को पूरा करने की खातिर
छोड़ेगी  न कोई कसर,
उड़ाने ज़िन्दगी की ये  हमसफ़र !
आज के इस मुबारक दिन
क्या तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल, हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!!

तूने ओ ललारी, मुझ पे ये रंग कैसा लगाया
कोई दाग निंदा का मुझे छू भी ना पाया !
जब से मैं अपने यार की दीवानी हुई
लोग समझे मैं और भी सुन्दर  सयानी हुई !!
न देख पाए कि  ये मैं नहीं, मुझ में  तू है
छू कर मेरे मन को ऐसा पावन  बनाया
तेरे ही हर रंग निखर कर मुझपे  है  आया !!
न देखा है मैंने खुदा  को कभी
पर जब भी देखा तुझे, नूरे खुदा  का दीदार पाया !!!
इस खुदा  ए   यार को और भला क्या दे सकती हूँ
तेरे ही रंग में रंगती रहूँ, ऐसी रंगोली देती हूँ तुम्हें !!!!

तेरी इच्छा में अपनी इच्छा बनाती  रहूँ
तेरे सुख में नित सुख अपना पाती रहूँ !
जो एक पल भी भुलूँ  तो काफ़िर हूँ मैं
ये पल ही है मेरे पास तुझे देने के लिए
जितनी भी लिखी हैं, इन पलों में सांसे
बना उनकी तसबीह, हर पल सिमरे तुम्हें !!

हीरे को हीरे मोती भला क्या देता है कोई
जो अनमोल हो उसकी कीमत क्या दे सकता है कोई !
मेरी जीवन का ये चरखा, बना  है बस  खातिर तेरी
हर तंद पावां तेरे नाम दी, तुझ पे जायूं  मैं  बल्हारी
मुझ में मैं न हूँ अब बाकि, हो गयी हूँ  तेरी ही सारी !!
आज के इस मुबारक दिन
क्या तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल, हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!!


रूह से रूह का प्यार , तेरे लिए कभी बंदिश न बने
जब भी चाहे, तेरी लिए एक नई  राह बने !
दुनिया का  हर रिश्ता शर्तों से बंधा है
अपने रूहानी यार को और कुछ नहीं
बस बेशर्ते मोहब्बत की आज़ादी  देती हूँ तुम्हें !!

खुद बढ़ कर  खुदा  ने  किया मुझ निमानी पे रहमों करम
जब भी भरनी चाही उड़ान, दिया तेरा साथ और सारा आलम
इस सफ़र के हर जाम को घूँट-घूँट पिए, जब तक हो दम कायम !
बन जोगी की जोगन खुद को समर्पित करती हूँ तुम्हें
और भला क्या तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!

ज़िन्दगी की डोर बंधी सांसों से
सांसे बंधी है पलों से
बिता हुआ पल और एक साँस की  कीमत
करोडो-अरबों  देकर भी वापिस ला सकता न कोई !
आज के इस मुबारक दिन
बस  यहीं कीमती तोहफा दे सकती हूँ तुम्हें
अपना हर पल, हर क्षण अर्पित करती हूँ तुम्हें !!!




Tuesday, 25 December 2012

मिली नई राह !!!!!



















कोई दूर चमकती रोशनी ने,
दिल में भर दिया उत्साह !
उड़ चले गगन में एक दूजे के संग
मानो मिल गयी उन्हें नई राह !!


ना मालूम है उन्हें मंजिल का
न पता जाना है कहाँ?!
फिर भी निकल पड़े है दोनों
थामे एक दूजे की बाँह!!

छोड़ झूठे जग के सहारे,
हर दम एक दूजे को पुकारे !
खिल खिल हँसते हो मस्त मलंग !!
उड़ चले गगन में एक दूजे के संग
मानो मिल गयी उन्हें नयी राह !!

घोर अँधेरा दूर हुआ,
जब हाथ पकड़ वो साथ चले !
सज गया उनका जहान,
जैसे नयी मिली है राह !!

बादलों की छावों से, तारों के गांवों से
उड़ गए प्रेम के पंख लगा कर !
दिल में लगन यार को मिलने की
ऐसे जगी मानो मिल गयी नयी राह !!

दिल को प्यार का राग सुनाया
निश्चय की लौ को मन में जगाया !
नयी ही धुन में गाते ,
उड़ चले  वो बेपरवाह!
मानो नयी मिली है राह!!

Thursday, 8 November 2012

माँ नहीं है वो मेरी, पर माँ से कम नहीं है!!!!!

                              




माँ का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है जो नि:स्वार्थ भाव से अपने बच्चों  के लिए जीती है। बच्चों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी और उनके गम में अपने गम देखती है। हर एक  रिश्ते में स्वार्थ होता है कहीं न कहीं,  जिसके लिए हम उससे मिलने वाले सुख को  याद करके रोते है। पर माँ का रिश्ता ऐसा होता है के हम बस माँ को ही याद करते है बिना किसी वजह !!! और वो बिना वजह  हर पल तैयार रहती है, बस हमारी  आहट  सुनने  को !! मरते हुए भी उसको अपने बच्चों के चिंता होती है, अपनी नहीं!! आज से ठीक 1 साल पहले एक माँ ये दुनिया छोड़ कर चली गई, जिसे मैं बहुत  प्यार करती हूँ !! जिसे मैंने कभी देखा नहीं, कभी मिली नहीं, बात भी नहीं की कभी . दरअसल वो मेरी माँ नहीं है, पर मेरे लिए माँ से कम नहीं है !!


उन्ही  के बारे में कुछ लिख रही हूँ :--


ना देखा कभी आपको,
ना मिलने का सबब हुआ !
दो बातें भी ना कर पाई,
फिर भी  आपसे प्यार है ,
बेशक माँ नहीं है आप  मेरी,
पर मेरे लिए मेरी माँ से कम नहीं है !!

जब जूझ रहे थे आप बीमारी से,
अस्पताल में अपने कोमा से !
चल रहा था सिलसिला हर तरफ दुआओं से ,
मांग रही थी ज़िन्दगी आपकी रब और पैगम्बर से !
पर कमी रह गई, मेरी इन दुआओं में,
जो छोड़ चली गई हमें इस दुनिया से !!
इस बात से भर गयी मेरी आँखें आंसुओं से,
बेशक माँ नहीं है आप  मेरी,
पर मेरे लिए मेरी माँ से कम नहीं है !!

ना जाने उन दिनों सन्नाटे से एक आवाज़ आई ,
शायद आपकी मेरे पास आने की आहट आई !
ऐसा लगा आप मुझसे आखिरी पल में कुछ कहने आई !


हक़ से मुझ पे अपना  एक हक़ जताने आई और कहती गई -

मुझे इस जहान को अब छोड़ जाना है,
पर एक वादा अब तुझे मुझ से निभाना है !
तू दोस्त है मेरे बहादुर बेटे की,
 तो मेरा हक़ से तुझे ये कहना है!
भीड़ में भी वो तन्हा है, न जाहिर करेगा  कभी !
ऐसा   थोड़ा  कमला, थोड़ा  सियाना है!
तो देती हूँ अपने एहसास तुझे,
क्यूंकि बेशक माँ नहीं हूँ मैं तेरी,
पर तेरे लिए तेरी माँ से कम नहीं हूँ !!

उनकी  इस चिट्ठी को, हुकम रब का माना है और ....

न है उसे  जरुरत मेरे किसी सहारे की , 
फिर भी  न छोड़ा है उसका साथ कभी,
हर सुख दुःख में उसके साथ चली,
न जाने दूंगी उसके चेहरे से ये मुस्कान कभी !!
एक माँ ने मुझे जन्म दिया और जीना सिखाया,
तो दूजी ने जीने  की वजह दे  दी,
वादा  है मेरा, हर  मुश्किल आसान  सफ़र में
उसके संग बस यूँ ही चलते जाना है !!
हर हाल में  एक माँ को दिया वादा निभाना है !!
क्यूंकि बेशक  माँ नहीं है आप  मेरी,
पर मेरी लिए मेरी माँ से कम नहीं है !!!


आंटी जी, अपना  वादा निभाने की पूरी कोशिश कर रही हूँ, और मैं ये भी जानती हूँ कि  आप कहीं न कहीं से देख रहे हो !!
अगर अपना वादा निभाने में मुझसे ज़रा  सी भी भूल हुई है तो माफ़ कर दीजियेगा! मैं आप जितनी बहादुर नहीं हूँ, इसलिए  मुझे अपना आशीष दीजियेगा कि  उसी बहादुरी से बस चलती जाऊं, बिना रुके बिना थके और अपने दोस्त का  ग़मों का खज़ाना  डेबिट और मेरे हिस्से की  खुशियाँ भी उसको क्रेडिट कर सकूँ !

और वैसे भी  हम दोनों  का  लिपिक संगठन   उस अफसर को ऐसे ही  थोड़ी छोड़ देगा !!

 आई लव यू आंटी जी !!!!!!!!!!






Friday, 26 October 2012


    चार दिन ज़िन्दगी के ............... 
               बस यूँ ही चलते जाना है !!!!!!!!!!!



पहला दिन 


 













           

 
जब से मिली थी तुझ से, तब से तुझ को जाना है !!
जानू  मैं  कैसा ये  रिश्ता पुराना है !!!
जाना है तो बस इतना कि
 
तेरे संग यूँ ही चलते जाना है !!



दूसरा दिन 








 













     
तेरी आहट देती दस्तक मुझे है, ये कैसा अफसाना है !!
तेरी ख़ामोशी में छिपी हर बेचैनी को मैंने जाना है !
तेरे ग़मों का खज़ाना मुझे मिल जाए,
सकून  भरी खुशियाँ तुझे दे पाऊँ 
तो ज़िन्दगी का सफ़र साकार जाना है !!
जाना है तो बस इतना कि
तेरे संग यूँ ही चलते जाना है !!!

मन में उठती है एक ही तरंग
सांसे हो इतनी जो बीते तेरे संग !
इस जोगन को अपने जोगी के संग
बस यूँ ही चलते जाना है !!


तीसरा दिन 









 




जानू आने वाला कल,
आएगा या नहीं ऐसा पल
जब तू समझे मुझे अपना सम्बल!
फिर भी जाना है तो बस इतना कि
ज़िन्दगी के हर मुश्किल आसान सफ़र में
तेरे संग बस यूँ ही चलते जाना है !!


 
चौथा दिन 















खुद को गवां तुझ में अपना अक्स पहचाना है !
जो एक पल भी मुख मोडूँ,
तो गुन्हेगार खुद को माना  है !!
जानू  ये कितना रिश्ता पुराना है
जाना है तो बस इतना कि
बन तेरी परछाई
बस यूँ ही चलते जाना है !!!





एक दिन कट चूका है,  दूसरा दिन तेरे संग चलने के  एहसास से कट रहा है !! 
 इन्शा  अल्लाह !!! बाकी  के दो दिन यूँ ही कट जायेंगे एक दूजे के रंग में रंगे एक साथ चलने से ..................


है ना !!!!!!!!!!!!!!!

Wednesday, 26 September 2012

                          क्यूँ???
                          (1)
देख कर ज़माने का चलन, मन में उमड़े है कई सवाल ना जाने क्यूँ !
सीरत कायम रहती है ता-उम्र, तो लोग बदलती सूरत के पीछे भागते है क्यूँ !
                     
ना लगा पाया है कोई भी कीमत एक मुस्कान की,
फिर रस्मो रिवाजों के नाम पर इंसानों की कीमत आंकतें हैं क्यूँ!

जब कुदरत ने बेहिसाब बांटी हैं नियामतें!
तो दूसरे की थाली में झाँकतें हैं क्यूँ?

                          (2)
रूहानियत के एहसास चमड़ी और दमड़ी से परे है
तो इन एहसासों को नामी ख़िताब देना जरुरी है क्यूँ !

गर सच में होती रिश्तों की मोहर ज़रूरी! 
तो फिर राधा और मीरा के संग ही शाम बुलाये जाते है क्यूँ !

जो होती नियत नेक ना शबरी के इंतज़ार की
तो चुने  हुए उसके झूठे बेर राम मजे से खाते क्यूँ !
                         (3)
प्यार में होता है सदा देना ही देना सोचना भी नहीं कुछ है लेना
तिजारत के तराजू में इसे फिर तोला जाता है क्यूँ !

कल जो ना खरा उतरा उम्मीदों पे,
 आज जो मांगे गम बिना उम्मीदों के
ऐसे सच्ची प्रीत पर शक का हक़ रखते है क्यूँ !

ना मुझे कोई उम्मीद है ना उसे कोई आस है
फिर ये अहसास सबसे खास लगता है क्यूँ !

बनाने के लिए मुझे आम से खास मेरे अक्स से कराई,
मेरी पहचान, दिया मुझे आकाश भरने के लिए उड़ान
जो मानू उसे अपना भगवान, तो पागल नादान मुझे कहता है क्यूँ !

                    (4)
 बहुत चालाक है वो मुरली वाला
जो सुनता सबकी अर्जी है पर करता अपनी मर्ज़ी है
जो एक भी पता हिले ना उसकी मर्ज़ी के बिना
फिर कर्मो की ये लीला रचाई ही क्यूँ !

बन राम शिला को अहिल्या बनाया
बन शाम ज़हर को अमृत बनाया
बहुत छलिया हो तुम जो ना करते ऐसे तो
कोई तुम्हे भगवन माने ही क्यूँ !

ये सच है के बंदा खुदा नहीं!
पर  बन्दे में नूर खुदा का है
तो बंदा रब से जुदा है क्यूँ !